अपने की आदेशों के खिलाफ खड़े हो जाते है एस डी एम

  कानपुर सिकंदरा की सिकंदरा तहसील के हिम्मतपुर गांव में मकान बनने को लेकर उपजिलाधिकारी को दिये गये प्रार्थना पत्र के आधार पर लेखपाल की जांच रिपोर्ट को संस्तुति सहित प्रेषित करने की लिखित रिपोर्ट तहसीलदार द्वारा जब उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंची तब सूरज दयाल के मकान को बनने की अनुमति मिली। लेकिन 29 सितम्बर को गांव के ही राकेश कुमार आदि के प्रार्थना पत्र उपजिलाधिकारी सिकंदरा आरसी यादव ने मकान के कार्य को रूकवाने का आदेश दे दिया। मौके पर सिकंदरा थाना प्रभारी राम बहादुर पाल ने पहुंचकर कार्य रूकवा दिया जबकि गांव का हर व्यक्ति सूरज दयाल के मकान की जगह को वैध बता रहा था। ऐसा ही मामला सिकंदरा तहसील क्षेत्र के मनकापुर गांव का था जिसमें विपक्षी दिनेश कुमार सुमन देवी व सबीना बेगम मजरूल हसन के बीच जमीन को लेकर उपजिलाधिकारी न्यायालय में मामला विचाराधीन था जब विपक्षी दिनेश कुमार सुमन देवी ने उक्त जगह पर कार्य करना चाहा तो मजरूल हसन आदि के प्रार्थना पत्र कार्य रूकवाने उपजिलाधिकारी ने स्टे दे दिया और दूसरे दिन दिनेश कुमार आदि को कार्य करवाने का आदेश पारित कर दिया। ऐसा ही हिम्मतपुर गांव में हुआ 30 सितम्बर को फिर सूरज दयाल के प्रार्थना पत्र पर उपजिलाधिकारी ने कार्य करवाने का आदेश पारित कर दिया। ऐसा लगता है। उपजिलाधिकारी सिकंदरा अपने ही आदेशों के खिलाफ क्यों खड़े हो जाते हैं। यह चर्चा अब आम होती जा रही है।