बेरहमी से पटककर नवजात की ली जान ।

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पीपीगंज इलाके में किशोरी से दुष्कर्म, उसे गर्भवती बनाने और फिर नवजात की हत्या जैसे जघन्य अपराध के मामले में पुलिस की सुस्ती बृहस्पतिवार को बस इतनी टूटी कि पीपीगंज, कैंपियरगंज थानेदार बृहस्पतिवार को गांव पहुंचे, पूछताछ की औपचारिकता की और लौट आए। पीड़िता कहां है, किस हाल में है, यह जानने की जहमत अब भी पुलिस ने नहीं उठाई।

दरअसल इस जघन्य मामले के वैज्ञानिक अनुसंधान में पुलिस दिलचस्पी ले तो कुल एक दिन में दूध का दूध, पानी का पानी होना मुमकिन है, मगर इसके लिए जो संवेदना चाहिए, वह किसी प्रभावशाली के दबाव में मर-सी गई है। जानकारी के मुताबिक छह फरवरी 2020 को पीपीगंज थानेदार की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या और पैदाइश छिपाने की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में काम कर रही पुलिस मामले में पहले दिन से ही लापरवाह बनी हुई है।

इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए डीआईजी राजेश डी मोदक ने पूरे प्रकरण में कार्रवाई को लेकर एसएसपी को निर्देशित किया था। उधर, एसएसपी के आदेश पर बुधवार को गई पुलिस ने खानापूरी ही की थी। इसकी जानकारी होने पर एसएसपी डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने बृहस्पतिवार को कड़ी नाराजगी जताई। इससे हरकत में आई पीपीगंज और कैंपियरगंज थाने की पुलिस ने कुछ तेजी दिखाई। पहली बार गांव में पुलिस के अंदाज में दोनों थानेदार पहुंचे और जांच को आगे बढ़ाने के लिए लोगों से बातचीत की, उनके टेलीफोन नंबर आदि नोट किए।

अमर उजाला ने की पड़ताल

क्या पुलिस जिस तरह से जांच कर रही है, वही अनुसंधान का सही तरीका है, यह जानने के लिए अमर उजाला ने पुलिस अधिकारियों, डॉक्टरों और अधिवक्ताओं से बात की। उन्होंने सामने रखे गए तथ्यों का अध्ययन करके दो टूक कहा पुलिस मामले को घुमा रही है। उन्होंने स्टेप दर स्टेप बताया कि किस तरह से वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपराधी बेनकाब कर जेल के सीखचों के पीछे भेजे जा सकते हैं।

नवजात बच्ची की लाश मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहती है, बच्ची के सिर पर कटे और नीलगू निशान है। सभी चोटें मृत्यु पूर्व की हैं। मौत का कारण, चोटों से बच्ची कोमा में गई और मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर हत्या और पैदाइश छुपाने का मुकदमा दर्ज। डीएनए के लिए बच्ची के अवशेष का नमूना संरक्षित। यानि अपराध हुआ।

नाबालिग ने बच्ची को जन्म दिया। यौनशोषण के चलते वह गर्भवती हुई। समाज में थू-थू से बचने और यौनशोषण की कहानी पर पर्दा डालने के लिए यह अपराध किया जा सकता है। मोटिव है।

फिर कैसे कर सकते हैं, अनुसंधान ?
रिटायर सीओ शिवपूजन सिंह यादव कहते हैं कि इसके लिए सबसे पहले नवजात की मां चाहिए। पुलिस मां को सामने लाकर उसका मेडिकल कराए कि क्या उसने हाल ही में बच्चे को जन्म दिया। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. बबीता कहती हैं कि प्रसव के छह सप्ताह के भीतर मेडिकल कराकर इसकी पुष्टि की जा सकती है। डीएनए नमूने से मृत बच्चे और मां की डीएनए प्रोफाइलिंग मैच करा लें। पलक झपकते पुष्टि हो जाएगी कि वाकई वही वह मां है जिसके नवजात की लाश मिली थी।

फिर क्या ?

मां मिल गई। अब उससे पूरे घटनाक्रम के बारे में बयान ले। संभव है कि वह सब कुछ बता दे। बता दे कि बच्चा किसके संसर्ग से हुआ। उससे पुलिस पूछताछ करे। डीएनए फिंगर प्रिंटिंग टेस्ट प्रस्तावित करे। आरोपित न माने तो न्यायालय का आदेश लेकर डीएनए जांच करा लें। अगर मां बयान में कुछ न बताए तो संदिग्धों से पूछताछ करें। उनका और नवजात का डीएनए मैच करा लें। सच सामने होगा।

नाबालिग मां और दुष्कर्मी की पुष्टि होने के बाद उनके बयानों से सारी कहानी साफ हो जाएगी। नाबालिग मां-उसकी मां और पिता के बयानों से सारी कहानी साफ हो जाएगी। वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल करें, अभियुक्तों का सजा से बचना मुश्किल होगा।

पुलिस पर क्यों उठ रही हैं अंगुलियां
– पुलिस को अब तक पता चल चुका है कि नवजात की मां कौन है। उसके पिता को पूछताछ के लिए बुलाया भी गया, मगर अब तक नवजात की मां से पूछताछ नहीं की गई।
– पुलिस बयान लेने में समय जाया कर रही है। जबकि इसकी उतनी जरूरत नहीं। वरिष्ठ अधिकारियों के कहने के बावजूद अनुसंधान एक कदम आगे नहीं बढ़ा।
– क्षेत्र के कुछ प्रभावशाली लोग इस जांच को इस बहाने आगे नहीं बढ़ने देना चाहते कि इससे उनके परिवार की बदनामी होगी, क्योंकि जिस लड़की ने बच्चे को जन्म दिया वह उनके यहां काम करती थी।

पुलिस और संदिग्धों की उलझन
अगर मां मिल गई तो मामला और उलझ जाएगा। इसलिए लड़की को गायब कर दिया गया। नवजात की मां की उम्र महज 14 साल बताई जा रही है। यदि इससे कुछ ज्यादा भी हुई तो भी वह नाबालिग है, इसमें किसी को कोई शक नहीं। शादी हुई नहीं है। फिर किसके संसर्ग से बच्चा पैदा हुआ। विवेचना में जो चेहरा सामने आएगा। वह दुष्कर्म ( 376 आईपीसी) का भी आरोपित होगा। अधिवक्ता रूपाली त्रिपाठी कहतीं हैं, शारीरिक संबंध बनाने में नाबालिग की सहमति कोई मायने नहीं रखती।

चूंकि नाबालिग से लैंगिक अपराध का मामला है, इसलिए पॉक्सो में भी कार्रवाई होगी। यानि आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो का मुकदमा भी दर्ज होगा। यही वह बिंदु है जहां पुलिस के कदम ठिठक रहे हैं, वरना जिस तरह का दबाव है पुलिस मां को तलाश कर दुर्घटनावश बच्चे की मौत करार देकर सारा मामला रफा-दफा कर सकती थी, मगर नवजात की मां की कम उम्र सारे मामले को फंसा दे रही है।

वीडियो बनाकर अफसरों को भेजा, ताकि बता सकें गवाह नहीं

किसी भी घटना के होने पर प्रधान से भी संपर्क किया जाता है। इस मामले में एक प्रधान के प्रतिनिधि बोलने को तैयार हैं, मगर पुलिस जब जाती है तो उनके ना होने की बात ही सामने आती है। पुलिस ने लड़की के घर के आसपास के लोगों का वीडियो बनाया है ताकि यह साबित किया जा सके कोई गवाह नहीं है, और मामले को रफा-दफा किया जा सके। यह बात समझ से परे है कि आखिर वैज्ञानिक साक्ष्य होने के बावजूद पुलिस बयान लेने को बेचैन क्यों है?

कब क्या हुआ
31 जनवरी : पीपीगंज इलाके में नवजात का शव झाड़ियों में मिला
4 फरवरी : पोस्टमार्टम में नवजात की हत्या किए जाने की पुष्टि हुई
6 फरवरी : थानेदार पीपीगंज की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या, पैदाइश छिपाने का केस हुआ
7 फरवरी : विवेचना कैंपियरगंज पुलिस के हवाले कर दी गई
11 फरवरी : कैंपियरगंज थानेदार ने घटनास्थल का मौका मुआयना किया
12 फरवरी : पीपीगंज से पीड़ित किशोरी संदिग्ध हाल में लापता हो गई
16 फरवरी : किशोरी के बारे में पूछताछ करने के लिए गांव में पीपीगंज पुलिस पहुंची
19 फरवरी : डीआईजी राजेश डी मोदक ने गंभीर मामले में कार्रवाई का आदेश दिया
19 फरवरी : प्रभावशाली के घर चाय-पानी, फिर पीड़ित के घर ताला देख लौट आई पुलिस
20 फरवरी : एसएसपी के सख्ती के बाद फिर गांव में गई पुलिस, कुछ लोगों का नाम, नंबर नोट कर चली आई

डीएनए सुरक्षित, आरोपित मिले तो कराएंगे जांच
कैंपियरगंज थानेदार (विवेचक) निर्भय नारायण सिंह ने बताया कि डीएनए को सुरक्षित रखा गया है। आरोपित के मिलने पर डीएनए लेकर उसकी जांच करा ली जाएगी। अभी उसे सुरक्षित रखा गया है और आरोपित की तलाश की जा रही है।

…तो बेरहमी से पटककर मारी गई थी नवजात बच्ची

पीपीगंज इलाके में नवजात बच्ची की हत्या जन्म लेने के तत्काल बाद बड़ी बेरहमी से की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक बच्ची के सिर पर गहरे घाव के निशान थे। जिसके चलते वह कोमा में चली गई और बाद में उसने दम तोड़ दिया। उसका पेट पूरी तरह से खाली था, यानि उसे मां का दूध तक नसीब नहीं हुआ।

जानकारी के मुताबिक, 31 जनवरी को नवजात बच्ची का शव पीपीगंज इलाके के एक गांव की झाड़ी में मिला था। अज्ञात शव होने की वजह से चार फरवरी को पोस्टमार्टम हुआ था। पोस्टमार्टम के समय ही स्पष्ट हो गया था, करीब एक हफ्ते पहले उस शिशु को मारा गया था। इसका मतलब है कि बच्ची का जन्म 31 जनवरी से पहले हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का एक डॉक्टर से अध्ययन कराया गया था तो जो कुछ सामने आया, उससे सुनने के बाद किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, सिर पर तीन इंच से गहरा घाव होने से स्पष्ट है कि उसे पटका गया होगा। बगल में कट के निशान से लगता है कि उभरे ईंट पर यह घटना हुई होगी। दूसरे कोमा में जाने पर बच्ची को फेंका गया होगा, फिर उसकी कुछ देर बाद ही मौत हो गई थी।

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तो साक्ष्य मिटाने की तैयारी में पुलिस
पीपीगंज में जिस किशोरी से दुष्कर्म कर फिर उसके नवजात की हत्या की गई है। उस मामले में पुलिस की देरी एक बड़े साक्ष्य को मिटा सकती है। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. बबिता शुक्ला ने बताया कि किसी लड़की के मां बनने पर छह सप्ताह के भीतर जांच कराई जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि वह प्रसूता थी, मगर धीरे-धीरे गर्भाशय सामान्य हो जाता है। फिर इसका पता लगा पाना मुश्किल होता जाता है। जिस तरह से समय आगे बढ़ेगा जांच में इसकी पुष्टि उतनी ही कठिन हो जाती है।

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jaya verma

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