प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए कंपनियों ने दिया रेलवे कर्मचारियों को दो करोड़ तक सैलरी का ऑफर

प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए कंपनियों ने दिया रेलवे कर्मचारियों को दो करोड़ तक सैलरी का ऑफर

रेलवे में क्या रखा है, छोड़िए नौकरी। हमारी प्राइवेट ट्रेन चलाइए। पांच साल में दो करोड़ वेतन देंगे। इतना ही नहीं 65 साल तक नौकरी पक्की रहेगी। इस दौरान आपको रेल से भी अच्छी सुविधाएं देंगे।

यह ऑफर एक प्राइवेट रेल कंपनी का है। कंपनी के अधिकारी एक महीने के अंदर पूर्वोत्तर रेलवे के एक दर्जन लोको पायलट और गार्डों को नौकरी के लिए लुभावने ऑफर की पेशकश कर चुके हैं। अभी तक जितने भी लोगों को ऑफर मिला है, वे अनुभवी और वरिष्ठ कर्मचारी हैं। साथ ही जिनका कॅरियर बेदाग है।ऐसा ही ऑफर पाने वाले एक लोको पायलट बताते हैं

कि उनकी नौकरी दो साल बची है। उनसे कंपनी के अधिकारी ने कहा कि 60 साल में रिटायर होने का इंतजार करने की बजाय वीआरएस लेकर हमारी पेशकश स्वीकार कर सकते हैं। दूसरा रास्ता भी बताया कि हमारा ऑफर स्वीकार कर लीजिए और रेल की नौकरी करते रहिए। जब हमें जरूरत होगी तब आपको दो माह का समय देंगे। दो माह में रेल से वीआरएस लेकर कंपनी से जुड़ जाइएगा। 

दरअसल, रेल मंत्रालय ने 100 रूटों पर 150 प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए टेंडर जारी कर दिया है। इसके लिए कंपनियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। लेकिन कंपनियों के सामने बड़ी समस्या हाई स्पीड ट्रेन के परिचालन को लेकर है। कंपनियों को सुपरफास्ट ट्रेनों को चलाने के लिए अनुभवी और वरिष्ठ चालक और गार्डों की जरूरत होगी। फिलहाल कंपनियों के पास अभी इसका सिस्टम नहीं बन सका है। इसी के चलते कंपनियां रेल के ही वरिष्ठ रनिंग स्टॉफ को आकर्षक पैकेज का ऑफर दे रही हैं। 

कंपनियों ने सबसे पहले सेवानिवृत्त लोको पायलट और गार्डों की भर्ती की योजना बनाई थी। स्क्रनिंग के दौरान इच्छुक कर्मियों की उम्र 65 के पार थी। ऐसे कर्मचारी रेलवे के मानक पर खरा नहीं उतरते, इसीलिए अब कंपनियां दो-तीन साल में रिटायर होने वाले अनुभवी चालकों को भर्ती करने की तैयारी में जुटी हैं। 

शीतल प्रसाद, सचिव, ऑल इंडिया गार्ड काउंसिल बताते हैं कि हमारे तीनों मण्डलों के एक दर्जन से ज्यादा गार्डों के पास कंपनियों के फोन आए थे। जिनके पास फोन आए वह सभी 56 से 58 वर्ष के बीच हैं। सभी को कंपनी ने दो गुने वेतन का ऑफर दिया है। एके सिंह, केन्द्रीय संरक्षक आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने बताया कि कई वरिष्ठ चालकों के पास कंपनियों के ऑफर दिया हैं। कुछ ने मुझसे राय भी मांगी है। मैंने सभी को कहा है कि यह बेहतर अवसर है। रेल वैसे भी सभी को उम्र से पहले रिटायर कर रही है।

रेलवे के नियम के अनुसार बतौर असिस्टेंट लोको पायलट भर्ती होने के बाद 20 साल के कार्य अनुभव के बाद ही मेल एक्सप्रेस ट्रेन चला सकता है। असिस्टेंट लोको पायलट के एक निश्चित समय के बाद सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट, इसके बाद लोको पायलट गुड्स, फिर लोको पायलट पैसेंजर और उसके बाद लोको पायलट मेल-एक्सप्रेस का काम मिलता है। प्राइवेट ट्रेनों को भी सुरक्षा-संरक्षा के मानक पूरे करने पड़ेंगे। 

नियुक्ति के समय सहायक लोको पायलट- ग्रेड पे 1900
औसत वेतन 32,000 से 35,000 हजार

सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट- ग्रेड पे 2400
औसत वेतन 80,000 से 1,00,000 रुपये

लोको पायलट मेल एक्सप्रेस तक पहुंचने पर ग्रेड पे-4200
औसत वेतन-1,20,000 से 1,50,000
(औसत वेतन माइलेज के आधार पर बनता है)

असिस्टेंट लोको पायलट का कॅरियर
असिस्टेंट लोको पायलट पद पर भर्ती होने के बाद लोको पायलट एक्सप्रेस या चीफ लोको इंस्पेक्टर तक प्रमोशन मिलता है। 

 

सीनियर लोको पायलट का वेतन सवा से डेढ़ लाख रुपये
वरिष्ठ लोको पायलट का वेतन इस समय में करीब डेढ़ लाख रुपये है। 58 वर्ष की उम्र में अगर लोको पायलट वीआरएस लेता है तो उसे 50 से 60 हजार रुपये के बीच पेंशन मिलेगी। साथ ही पास की सुविधा भी रेलवे से मिलती रहेगी। ऐसे में प्राइवेट कंपनी ज्वाइन करने पर उन्हें तीन-साढ़े तीन लाख रुपये वेतन भी मिलेगा।