रमेश कालिया जिसका एनकाउंटर करने के लिए बाराती बने थे पुलिस वाले

माफिया को ढेर करने 'दुल्हन' के साथ पहुंचा था ये IPS, ऐसा था पूरा एनकाउंटर
 
हज

रमेश कालिया एक समय यूपी और लखनऊ का सबसे बड़ा गैंगस्टर था। उसके अपराध से लोग कांपते थे। वह बिजनेस मैन से पैसे वसूलता था, रंगदारी करता था, ठेके से वसूली करता था। 2002 में बारांबकी में सपा नेता रघुनाथ यादव और उनके दो साथी मारे गए। इस केस का आरोप सीधे-सीधे कालिया पर लगा। इसके बाद क्राइम की दुनिया में उसका वर्चस्व बढ़ने लगा। 2004 में उन्नाव में उसने सपा एमएलसी और बाहुबली अजीत सिंह की हत्या कर दी थी। 

रमेश कालिया के शूटआउट के लिए खास तौर पर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की टीम बना गई थी। लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं आ रहा था। तभी पुलिस को इम्तियाज नामक एक बिल्डर मिला, जिसने कालिया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि वह उससे 5 लाख रुपए मांग रहा है।

तब के एसएसपी नवनीत सिकेरा ने प्लान बनाया कि इम्तियाज के सहारे कालिया तक पहुंचा जाए। एसएसपी के कहने पर इम्तियाज ने कालिया को फोन किया और कहा कि वह उसे कुछ पैसे देने को तैयार है। इसके बाद कालिया ने उसे मिलने का वक्त दिया। तारीख और जगह दोनों तय हुई, इधर पुलिस भी अपनी कमर कस चुकी थी। 

12 तारीख फरवरी 2005 को इम्तियाज कालिया से मिलने पहुंचा। उसके सपोर्ट के लिए पुलिस की टीम बाराती बनकर तीन अलग-अलग गाड़ियों में बैठ कर नीलमत्था के लिए रवाना हो गई। इम्तियाज डरते-डरते कालिया के मकान में पहुंचा। उसने कालिया को सिर्फ 40 हजार रुपए दिए और कहा कि वह उसे माफ कर दे, अभी उसके पास इतनी ही रकम की व्यवस्था हो पाई।

कालिया ने वो पैसे उसके ऊपर फेंक दिए और गालियां देना शुरू कर दी। तभी पुलिस की टीम ने फिल्मी अंदाज में उसके ठिकाने पर धावा बोल दिया। दोनों तरफ से करीब 20 मिनट गोलाबारी चलती रही। आखिरकार कालिया मारा गया। इस एनकाउंटर में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।