जानिए, क्रिसमस की वो परंपराएं जिनके बिना अधूरा है क्रिसमस

ईसा मसीह के जन्म के रूप में मनाया जाता है क्रिसमस
 
क्रिसमस
क्रिसमस

25 दिसंबर का दिन पूरी दुनिया में क्रिसमस के त्योहार के नाम से जाना जाता है। इस दिन को ईसा मसीह के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है। इस समय पूरी दुनिया में क्रिसमस को लेकर तैयारियां जोर शोर से हो रही हैं। हालांकि कोरोना और ओमीक्रॉन की महामारी के चलते कई देशों में प्रतिबंधों के साथ क्रिसमस मनाया जाएगा। लेकिन इसके बाद भी क्रिसमस की कई ऐसी परंपराए हैं जिनके बिना क्रिसमस का पर्व अधूरा है। आज हम आपको क्रिसमस की कुछ ऐसी ही परंपराओं के बारे में बता रहे हैं, जो हर क्रिसमस पर जरूर से की जाती हैं....

क्रिसमस ईसाई धर्म को मानने वालों का सबसे बड़ा त्योहार है। इस दिन का वो लोग साल भर बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस दिन ईसाई लोग अपने घरों और गिरजा घरों को नये रंगों और रोशनियों से सजाते हैं।

क्रिसमस के दिन गिरजा घरों में कैंडिल या मोमबत्ती जलाने की परंपरा है। इस दिन लोग ईशु की याद में मोमबत्तियां जलाते हैं। उनकी मान्यता है कि ये उनके जीवन में प्रकाश और तरक्की लाती है।

 क्रिसमस के दिन रात में 12 बजे गिरजाघरों में विशेष प्रार्थना की जाती है। माना जाता है कि ईसा मसीह का जन्म इसी समय हुआ था।

क्रिसमस के दिन केक काटने की भी परंपरा है। इस दिन लोग तरह-तरह के पकवान बनाते हैं लेकिन ईसा के जन्म की खुशी में केक काटने और उसे लोगों में बांटने का विशेष रिवाज है।

क्रिसमस के दिन लोग एक-दूसरे को बधाई संदेश, कार्डस और गिफ्टस देते हैं और उनके आने वाले जीवन में खुशहाली और तरक्की की कामना करते हैं।

इस दिन घरों में ईसा के जन्म के दृश्यों की झांकी सजाने की भी परंपरा है। लोग अपने घरों में मां मरियम और गोशाला के उस दृश्य की झांकी या तस्वीर सजाते हैं जब ईसा का जन्म हुआ था।

क्रिसमस ट्री सजाना भी इस दिन की खास परंपरा में शामिल है। लोग आर्टीफीशिल या फर्न के पेड़ को क्रिसमस ट्री के रूप में सजाते हैं। इसमें लगी रंगीन रोशनियां और उपहार जीवन में सकारात्मकता का संचार करती हैं।

क्रिसमस के दिन बच्चों को सबसे ज्यादा इंतजार रहता है सेंटा क्लाज का। जो बच्चों को उनके मन की ख्वाहिशों को पूरा करते हैं।