अपनी तो जैसे-तैसे कट जाएगी, किसान का क्या होगा ? 2017 के बाद से नही बढें गन्ने के रेट।

अपनी तो जैसे-तैसे कट जाएगी, किसान का क्या होगा ? 2017 के बाद से नही बढें गन्ने के रेट।

जिस प्रकार किसानों का आंदोलन लगातार बढ़ता ही जा रहा है उसी बीच किसानों के सामने एक और नया मुद्दा आ खड़ा हुआ है आपको बता दें भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद करीब 4 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी गन्ने का रेट सिर्फ ₹10 बड़ा है वहीं यदि बात डीजल की करें तो डीजल का रेट ₹40 से अधिक बड़ चुका हैसूबे में योगी सरकार के आने के बाद गन्ने के मूल्य में सिर्फ 2017-18 के सीजन में 10 रुपये प्रति क्विटंल बढ़ाया गया था, जिसके बाद से दोबारा कीमत नहीं बढ़ाई गई है जबकि सूबे में गन्ना किसान किसी भी पार्टी की सत्ता बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं

यूपी गन्ना उत्पादन में नंबर वन

बता दें कि देश का सर्वाधिक गन्ना उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है. देश के गन्ने के कुल रकबे का 51 फीसद और उत्पादन का 50 और चीनी उत्पादन का 38 फीसद उत्तर प्रदेश में होता है. भारत में कुल 520 चीनी मिलों से 119 उत्तर प्रदेश में हैं. देश के करीब  48 लाख गन्ना किसानों में से 46 लाख से अधिक किसान चीनी मिलों को अपने गन्ने की आपूर्ति करते हैं. यहां का चीनी उद्योग करीब 6.50 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार देता है.

वर्ष 2017 में बनी भाजपा सरकार ने पेराई सत्र 2017-18 में गन्ने के राज्य परामर्शी मूल्य में दस रुपये की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने न तो वर्ष 2018-19 में रेट बढ़ाया और न ही चालू पेराई सत्र 2019-20 के लिए बढ़ोतरी की। शनिवार को प्रदेश के गन्ना आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने अगेती प्रजाति के लिए 325, सामान्य प्रजाति के लिए 315 और अनुपयुक्त प्रजाति के लिए 310 रुपये प्रति कुंतल रेट घोषित किया। रेट की घोषणा होते ही किसान संगठनों में उबाल आ गया।

किसान महंगाई को देखते हुए लगातार सरकार से 450 रुपये कुंतल गन्ने के दाम मांग रहे थे। गन्ने के दाम बढ़ाए जाने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

नवम्बर माह में जिले की चीनी मिल चल गई थी। कई माह चीनी मिल चलने के बावजूद गन्ने के दाम घोषित नहीं हुए थे। जिले के किसान मांग कर रहे थे कि गन्ने के दाम शीघ्र घोषित होने चाहिए। महंगाई को देखते हुए गन्ने के दाम बढ़ाए जाए। एक बार फिर गन्ने के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। जिले के किसानों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सरकार को गन्ने के दाम बढ़ाने चाहिए थे। हर चीज पर महंगाई बढ़ रही है। महंगाई को देखते हुए सरकार को किसानों को भी राहत देनी चाहिए थी लेकिन किसानों को राहत नहीं मिली। किसानों ने कुछ इस तरह अपनी प्रतिक्रिया दी।  

कब कितना रहा गन्ना रेट

पेराई सत्र                        गन्ना रेट           सरकार

2008-09                    140-145          बसपा

2009-10                     165-170          बसपा

2010-11                     205-210          बसपा

2011-12                     240-250           बसपा

2012-13                    275-280-290       सपा

2013-14                     275-280-290      सपा

2014-15                     275-280-290      सपा

2015-16                      275-280-290       सपा

2016-17                      300-305-315       सपा

2017-18                      305-315-325      बीजेपी

2018-19                     305-315-325       बीजेपी

2019-20                     310-315-325       बीजेपी