अमित शाह : किसान आंदोलन के उपद्रव के बाद घायल पुलिसकर्मियों से अस्पताल मिलने पहुचें।

अमित शाह : किसान आंदोलन के उपद्रव के बाद घायल पुलिसकर्मियों से अस्पताल मिलने पहुचें।

कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले करीब दो महीने से चल रहे किसानों का आंदोलन गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में हिंसा के बाद अब कमजोर पड़ता दिख रहा है।

दिल्ली हिंसा को देखते हुए दिल्ली-नोएडा रोड पर स्थित चिल्ला बॉर्डर पर धरना दे रहे भारतीय किसान यूनियन (भानू) ने बुधवार से अपना धरना वापस ले लिया।

अब चिल्ला बॉर्डर के माध्यम से दिल्ली-नोएडा मार्ग 57 दिनों के बाद यातायात के लिए फिर से खुल गया। वहीं, दिल्ली गाजियाबाद रोड पर भी यातायात बहाल हो गई है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह घायल पुलिसवालों को देखने अस्पताल पहुचे हैं। इधर, दिल्ली हिंसा को लेकर पुलिस ने 25 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं और 93 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।

एक्टर दीप सिद्धू और लक्खा का भी नाम एफआईआर में दर्ज है। तो चलिए जानते हैं किसान आंदोलन और उससे जुड़ी जानकारी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली हिंसा में घायल पुलिस कर्मियों का हाल जानने सिविल लाइन्स स्थित अस्पताल पहुंचे हैं।

ये सभी पुलिस कर्मी ट्रैक्टर परेड के दौरान 26 जनवरी को हुई हिंसा में घायल हुए थे।

दिल्ली पुलिस ने ट्रैक्टर रैली के संबंध में पुलिस के साथ हुए समझौते को न मानने के लिए योगेंद्र यादव, बलदेव सिंह सिरसा, बलबीर एस राजेवाल सहित कम से कम 20 किसान नेताओं को नोटिस जारी किए हैं।

उन्हें 3 दिनों के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है। 
गृह मंत्री अमित शाह गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा में घायल पुलिसवालों का हाल जानने के लिए नॉर्थ दिल्ली के दो अस्पतालों का दौरा करेंगे। 

बागपत में जिला प्रशासन की ओर से बुधवार रात प्रदर्शनकारी किसानों को हटाया गया। बागपत के एडीएम ने कहा कि एनएचएआई ने एक पत्र लिखकर काम को पूरा करने का अनुरोध किया था।

किसानों के प्रदर्शन की वजह से एनएचएआई के काम में देरी हो रही थी।

गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने देर रात उनकी बिजली काट दी।

किसानों को रात भर यह डर सताता रहा कि पुलिस देर रात पुलिस कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

आंदोलन स्थल पर राकेश टिकैत ने कहा कि इस बाबत वह प्रशासन से बात करेंगे।

उन्होंने कहा कि यह वैचारिक क्रांति है, यह खत्म नहीं होगी।