जेल से MLA का चुनाव जीतने वाला पहला बाहुबली

जेल से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस को चुनौती दी
 
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पूर्वांचल के उस बाहुबली की, जिसने जेल से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस को चुनौती दी और चुनाव जीत लिया। आज भले ही राजनीतिक दल खुद को माफियाओं को दूर रखने का दावा कर रहे हों लेकिन एक वक्त था जब वह दल की जरूरत हुआ करते थे। उन्हें पूर्वांचल के ब्राह्मणों का सिरमौर माना जाता है और हाल ही में उनके बेटे समेत पूरा परिवार समाजवादी पार्टी में शामिल हो गया। यहां बात हो रही है हरिशंकर तिवारी की।

जेल से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में हरिशंकर तिवारी ने कांग्रेस उम्मीदवार को पटखनी देकर सनसनी मचा दी थी और वह भी बड़े अंतर से। उनकी ताकत दो भांपते हुए कांग्रेस ने भी अगले चुनाव में उन्हें टिकट दे दिया और 2007 तक गोरखपुर की चिल्लूपार सीट से उनकी जीत का सिलसिला चलता रहा। इस बीच वह अलग-अलग दलों की जरूरत बनते गए। 1998 में कल्याण सिंह ने अपनी सरकार में मंत्री बनाया, तो बीजेपी के ही अगले मुख्यमंत्री बने रामप्रकाश गुप्त और राजनाथ सिंह सरकार में भी वह मंत्री हुए। इसके बाद मायावती सरकार में मंत्री बने और 2003 से 2007 तक मुलायम सिंह यादव की सरकार में भी मंत्री रहे।

एक वक्त उन्हें यूपी का डॉन कहा जाता था फिर बाहुबली राजनेता और फिर वह यूपी की सियासत के पंडित जी कहलाने लगे। वह 1985 का दौर था, जब इंदिरा गांधी के निधन के बाद पूरे देश में कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति की लहर चल रही थी। उस वक्त हरिशंकर तिवारी यूपी की जेल में बंद थे। उन पर गैंगस्टर ऐक्ट के तहत कार्रवाई चल रही थी।

 हरिशंकर तिवारी हर दल की जरूरत बन गए थे। यहां तक कि जब जगदंबिका पाल सूबे के एक दिन के सीएम बने तो उनकी कैबिनेट में भी वह मंत्री थे।' दरअसल 1998 में राज्यपाल रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह को सीएम पद से बर्खास्त कर लोकतांत्रिक कांग्रेस के जगदंबिका पाल को सीएम पद की शपथ दिलाई थी लेकिन अगले ही दिन बाजी पलट गई और कल्याण सिंह फिर से सीएम बन गए थे।