सोशल मीडिया में पहली बार ट्विटर ने लिया मोदी सरकार से पंगा

मोदी सरकार ने दिया था कंटेंट हटाने का आदेश
 
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सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर (Twitter) ने अपने प्लैटफॉर्म से आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के भारत सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी है. ऐसी जानकारी सामने आई है कि इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने फरवरी 2021 और 2022 के बीच ट्विटर पर अकाउंट या ट्वीट को ब्लॉक करने के 10 आदेश जारी किए थे. सरकार ने ट्विटर से कहा कि 1400 अकाउंट और 175 ट्वीट्स को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 (ए) के तहत हटाया जाए. जिसके बाद ट्विटर इस आदेश को चुनौती देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंच गया है.

ट्विटर द्वारा दायर याचिका के अनुसार, कंपनी ने मांग की है कि मंत्रालय ने जिन अकाउंट या ट्वीट्स को हटाने के लिए कहा है, उनमें से 39 पर कोई रोक न लगे. सरकार के इनसे जुड़े आदेशों को रद्द कर दिया जाए. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में ट्विटर ने कोर्ट से कहा है कि मंत्रालय कंपनी को सूचित किए बिना पूरे के पूरे अकाउंट को ब्लॉक करने के आदेश जारी कर रहा है. इन अकाउंट के जरिए किए गए ट्वीट्स को ब्लॉक करने को कहा जा रहा है. कंपनी ने कहा है, ‘कई यूआरएल ऐसे हैं, जिनमें राजनीतिक और पत्रकारिता संबंधी कंटेंट है. इस तरह की जानकारी को हटाना प्लैटफॉर्म पर दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का घोर उल्लंघन है.’

सरकार के आदेश को मनमाना बताया
कंपनी ने ये दावा भी किया है कि कई मामलों में मंत्रालय ने ब्लॉक करने से जुडे़ आदेश देते वक्त उचित कारण नहीं बताए हैं, जो धारा 69 (ए) के तहत जरूरी हैं. ट्विटर ने अपनी याचिका में कहा है कि उसकी मांग है कि कोर्ट द्वारा ब्लॉकिंग से जुड़े आदेशों को अलग रखा जाए क्योंकि वे आईटी अधिनियम की धारा 69 (ए) के आधार पर “गलत” हैं. कुछ आदेशों को “असंवैधानिक” बताते हुए, कंपनी ने कहा है, ‘आदेशों को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि वह धारा 69ए के साथ काफी हद तक मेल नहीं खाते, मनमाने हैं, यूजर्स को पूर्व सूचना प्रदान करने में विफल हैं और कई मामलों में असंगत हैं.’

ऐसी भी जानकारी है कि सरकार ने जिन अकाउंट और ट्वीट्स को लेकर आदेश दिया है, ट्विटर ने उनसे संबंधित जानकारी सील लिफाफे में कोर्ट को सौंपी है. क्योंकि धारा 69 (ए) के आदेशों को गोपनीय रखा जाता है. कंपनी ने यह भी कहा है कि जून में मंत्रालय से आदेशों का पालन नहीं करने के संबंध में नोटिस प्राप्त करने के बाद उसने उसका जवाब दिया और बताया कि आदेश के विरोध के चलते उसका पालन नहीं किया गया है.