चमोली ग्लेशियर : सिर्फ 120 मीटर खुली सुरंग 48 घंटे बाद, फंसी हैं अभी इतने लोग की जान

चमोली ग्लेशियर : सिर्फ 120 मीटर खुली सुरंग 48 घंटे बाद, फंसी हैं अभी इतने लोग की जान

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने से आस-पास के इलाकों में काफी तबाही हुई है। इस आपदा में तपोवन-रैणी क्षेत्र में स्थित ऊर्जा परियोजना में काम करने वाले करीब  202 कर्मी के लापता हैं। ग्लेशियर टूटने के चलते अलकनंदा और धौली गंगा उफान पर हैं। 

ऋषिगंगा प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों को निकालने का अभियान दूसरे दिन सोमवार देर रात तक जारी रहा। सुरंग में फंसे श्रमिकाें को निकालने सहित आसपास के क्षेत्र में राहत कार्य के लिए स्थानीय पुलिस के साथ ही सेना,आईटीबीपी, एनडीआरएफ सहित एसडीआरएफ के बहादुर जवान मौके पर डटे हुए हैं। 

लेकिन, चिंता की बात है कि जिस सुरंग में करीब 30-35 श्रमिक फंसे हुए हैं वह करीब एक मीटर लंबी है। करीब 48 घंटों के बाद ही सुरंग की 120 मीटर खुदाई हो पाई है।  सुरंग से मलबा हटाने के लिए जेसीबी ही एकमात्र विकल्प है। रातभर चले रेस्क्यू ऑपरेशन में अंधेरी सुरंग में जिन्दगी बचाने को जद्दोजहद जारी रही। श्रमिकों से संपर्क न हो पाना भी  एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। 

लेकिन, ग्राउंड जीराे पर डटे बहादुर जवान जिंदगी बचाने के लिए कोई कमी कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बताया गया है कि करीब 180 मीटर सुरंग से गाद व मलबा हटाने के बाद टी-प्वाइंट आएगा, जिसके बाद फंसे श्रमिकों को आसानी से बचाया जा सकेगा। फिलहार, राहत कार्यों में जुटे अधिकारियों का कहना है कि सुरंग में से मलबा व गाद हटाने का काम युद्धस्तर से जारी है। 

तपोवन विद्युत सुरंग में फंसे 35  लोगों की तलाश के लिए युद्ध स्तर पर कार्य हो रहा है। यह सुरंग 3 मीटर चौड़ी है। इसके प्रवेश द्वार से एक बार में एक ही मशीन अंदर जा सकती है । तपोवन के कुंवर सिंह कनियाल, रूप सिंह फस्र्वाण बताते हैं कि अंधेरी सुरंग में गाद भरी है। 

कार्यरत कम्पनी रितिक के अधिकारी राकेश डिमरी और एचसीसी के नीरज कंसल बताते हैं कि सुंरग के अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। तपोवन के ओम प्रकाश डोभाल कहते हैं कि सुरंग में गाद भरी है। सुरंग मीटर की है। 1800 मीटर तक सुरंग सपाट है। इसमें फंसे लोगों को बचाने के लिए मशीनें जुटीं हैं।

तपोवन जल विद्युत परियोजना के बाहर तबाही का मंजर पसरा है। नदी में आई गाद, रेत और मिट्टी कचारों ओर फैली है। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, प्रशासन , पुलिस समेत सेवा इंटर नेशनल के स्वयं सेवी 24 घंटे सुरंग के बाहर सेवा, खोजबीन और राहत अचाव अभियान में जुटे हैं।

अंधेरी सुरंग में जिंदगी बचाने के लिए रेस्क्यू अभियान देर रात तक चला। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, जिला अधिकारी स्वाति एस भदौरिया, पुलिस अधीक्षक यशवन्त सि़ंह ,एसडीआरआरएफ की डीआईजी रिधिम अग्रवाल टनल के सामने रेस्क्यू अभियान को संचालित करते रहे।

टनल के बाहर भी मलबा और भीतर कई मीटर तक टनों कीचड़ ही कीचड़। टनल के भीतर एक एक कदम उठाना भी किसी मुसीबत से कम नहीं। कब कहां पांव धंस जाए पता नहीं। टनल में रेस्क्यू अभियान चला रही एसडीआरएफ टीम को कदम कदम पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 

टनल के भीतर के हालात में रेस्क्यू आपरेशन चलाना बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है। रेस्क्यू टीम टनल से कीचड़ व गाद को हटाकर भीतर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए जूझती रही। लेकिन टनल में कई कई फीट मोटी गाद जमा होने से उनकी परेशानी भी बढ़ गई है।

जोशीमठ। रैणी गांव में बीते रविवार को आए जलजले में मलारी को जोड़ने वाला वाहन पुल बह गया है और सड़क में हजारों टन मलबा जमा हो गया है। रैणी में रेस्क्यू और नए पुल निर्माण आदि का जिम्मा बीआरओ के शिवालिक प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर एएस राठौर ने संभाल रखा है। चीफ इंजीनियर राठौर ने बताया कि यहां पर मलबा हटाने और नई सड़क और वैली ब्रिज बनाने का कार्य चल रहा है। इसमें अभी कुछ दिन लग सकते हंै।