यूपी के भूमाफिया दिलीप सिंह बाफिला की 48 करोड़ की संपत्ति होगी कुर्क, देखिये क्या है पूरा मामला।

 
भू माफिया

भूमाफिया दिलीप सिंह बाफिला पुत्र की सम्पत्ति को कुर्क किये जाने के आदेश लखनऊ पुलिस कमिश्नर ने पारित कर दिया गया है। इस संपत्ति की कीमत 48 करोड़ से ज्यादा की बतायी जा रही है। वहीं दिलीप सिंह बाफिला के ही रिश्तेदार प्रवीण सिंह बाफिला की संपत्ति को भी कुर्क किये जाने का आदेश पुलिस कमिश्नर ने पारित कर दिया है। एक तरफ मुख्यमंत्री के भू माफियाओं के खिलाफ सख्त निर्देश होने पर जिला प्रशासन लखनऊ भूमाफिया दिलीप सिंह बाफिला के खिलाफ प्रभावी कार्यवाहीयों को लगातार अंजाम दे रहा है, वही पर लखनऊ विकास प्राधिकरण में प्राधिकरण के लाड़ले भू-माफिया दिलीप सिंह बाफिला की बादशाहत कायम है। दिलीप पर कुल 17 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें अधिकतर गोमतीनगर और गोमतीनगर विस्तार थाने में दर्ज हैं। बाफिला के खिलाफ मार्च 2021 में भू-माफिया की कार्रवाई हुई थी। उसे जिलास्तरीय भूमाफिया घोषित किया गया था।

अपराध से अर्जित की अकूत संपत्ति

पुलिस के मुताबिक शक्तिनगर इंदिरानगर निवासी दिलीप सिंह बाफिला ने अपराध के माध्यम से धन अर्जित कर अवैध संपत्ति बनाई है। इसमें आरोपित की दो कार, एक बाइक, एक स्कूटी, बीकेटी में स्कूल की जमीन, द हिमालयन पब्लिक स्कूल सेवा संस्थान, मोहम्मदपुर सरैया में स्कूल की बिल्डिंग, मकदूमपुर में प्लाट और मेरठ में अलग-अलग बैंकों में जमा रुपये शामिल हैं। पूरी संपत्ति की कीमत 48 करोड़ 22 लाख तीन हजार चार सौ 42 रुपये है, जिसे यूपी गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रिया कलाप (निवारण) अधिनियम के तहत राज्य सरकार के पक्ष में कुर्क किया जाएगा।

गैंग में रिश्तेदार भी शामिल

गिरोह बनाकर आरोपित ने अपने भाई के बेटे प्रवीण को भी साथ मिला लिया। प्रवीण को गैंगलीडर बनाकर एक सोसाइटी का अध्यक्ष बना दिया था। पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए दोनों ने दो सोसाइटी बनाई थीं। इनमें एक द हिमालयन सहकारी आवास समिति और दूसरी बहुजन निर्बल वर्ग सहकारी गृह निर्माण समिति शामिल हैं। वर्तमान में बाफिला और उसका भतीजा ही दोनों सोसाइटियों के अध्यक्ष हैं।

मेहरबान रहता है एलडीए

लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी भूमाफिया दिलीप सिंह बाफिला को लगातार लाभ लेकर लाभ पहुंचाने के जुगाड़ में लगे रहते हैं। जिसका उदाहरण पिछले महीने भू-माफिया दिलीप सिंह बाफिला की समिति के सदस्य वीरेंद्र कुमार सिंह की 25 नवंबर 2021 शिकायत पर पुलिस कमिश्नर के निर्देश होने के बाद गोमती नगर विस्तार थाने से रिपोर्ट मांगने के बावजूद लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी महीनों से रिपोर्ट को दबाए बैठे हैं,यह तो केवल भू माफिया दिलीप सिंह बाफिला का जलवा ही है जो किसी की हिम्मत नहीं कि उनकी मर्जी के खिलाफ रिपोर्ट लगवा सके ।

वही दूसरे प्रकरण में भू-माफिया दिलीप सिंह बाफिला कि समिति ने लखनऊ विकास प्राधिकरण से न ही किसी प्रकार का नक्शा पास कराया है ना ही स्वामित्व प्राप्त किया है। लेकिन भू माफिया का जलवा है तो अमित राठौर विहित अधिकारी, लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वाद संख्या 189/2021 मैं 22 दिसंबर 2021 को भू माफिया के निर्देश पर उमाशंकर सिंह के पूर्व में सील किए गए भवन की सील अवैधानिक तरीके से खोल दी गई है।

आपको बता दें कि यह सारा खेल उन्हीं खसरों में हो रहा है जिनके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने हाईकोर्ट में रिव्यू फाइल कर रखा है। प्राधिकरण ढिंढोरा तो पीटता है कि हम भू-माफिया दिलीप सिंह बाफिला से जमीन छुड़ा लेंगे लेकिन अंदरखाने कहानी कुछ और चल रह है। हकीकत यह है कि प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ भू माफियाओं का गठजोड़ इतना गहरा हो चुका है कि शासन से लेकर प्रशासन तक कोई कुछ कर नहीं पा रहा है।