यूपी के हमीरपुर में मुर्दों से करा रहे थे मनरेगा में मजदूरी, चार के खिलाफ केस दर्ज

 
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उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में मनरेगा योजना में लाखों रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। इसमें गांव की महिला सरपंच और ग्राम पंचायत अधिकारी समेत चार लोगों के खिलाफ शनिवार को कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। जांच में मुर्दों से मनरेगा योजना में मजदूरी कराए जाने का मामला सामने आने पर बीडीओ ने यह कार्रवाई की है।

हमीरपुर के मौदहा ब्लॉक के खंडेह गांव निवासी पवन कुमार ने पिछले महीने अपर जिलाधिकारी रमेशचंद्र को मनरेगा में हुए घोटाले की शिकायत की थी। इसमें कहा था कि वह पिछले पंचायत चुनाव में जनपद महोबा के ग्राम बहिंगा का प्रधान रहा है। खंडेह में मनरेगा में हुए भ्रष्टाचार की जानकारी होने पर जब अभिलेखों की जांच कराई तो उसके नाम का फर्जी जॉब कार्ड बनाकर मनरेगा में काम करना दिखाया है। इसी तरह 15 अक्तूबर 2019 को मर चुके उनके पिता छोटेलाल पूर्व प्रधान का फर्जी जॉबकार्ड बनाकर मजदूरी कर हाजिरी भरी जा रही है।

लंबे समय से चल रहा है भ्रष्टाचार का खेल
पवन ने बताया उनके गांव में करीब 15 मृतकों को काम करना दिखाने के साथ बाहरी जनपदों में सरकारी और प्राइवेट नौकरी कर रहे लोगों के नाम दूसरे खातों में भुगतान किया गया है। साथ ही बताया कि यह भ्रष्टाचार साल 2018 से चल रहा है। इसमें ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी, ब्लॉक के कर्मचारी व ठेकेदार शामिल हैं। इस मामले में सीडीओ ने बीडीओ भैरव प्रसाद, अवर अभियंता सदानंद यादव और एपीओ नीरज सिंह को जांच सौंपी।

चार के खिलाफ केस दर्ज
अधिकारियों के आदेश पर शनिवार को बीडीओ भैरव प्रसाद ने प्रधान बसंती, ग्राम पंचायत अधिकारी आशीष, तकनीकी सहायक रामबाबू और कंप्यूटर ऑपरेटर लोकेंद्र सिंह के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। इनके खिलाफ फर्जी दस्तावेज के माध्यम से एक लाख 23 हजार 446 रुपये के सरकारी धन का फर्जीवाड़ा करने पर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। मौदहा कोतवाली के इंस्पेक्टर पवन कुमार पटेल ने बीडीओ की तहरीर पर महिला सरपंच समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इस मामले में ग्राम पंचायत अधिकारी, तकनीकी सहायक व कम्प्यूटर आपरेटर भी आरोपी बनाए गए है।