कोरोना वायरस से ठीक हुए बच्चों में दिख रहे एमआइएस-सी के मामले, जाने क्या है लक्षण

कोरोना वायरस से ठीक हुए बच्चों में दिख रहे एमआइएस-सी के मामले, जाने क्या है लक्षण

कोरोना से ठीक हुए बच्चों में मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआइएस-सी) के मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना की पहली लहर में भी बच्चों में इस तरह के मामले देखे गए थे। एम्स के डाक्टर कहते हैं कि कोरोना का संक्रमण ठीक होने के दो सप्ताह से दो माह बाद तक यह समस्या हो सकती है। इससे घबराने की जरूरत नहीं, इसका इलाज संभव है। इसके साथ ही डाक्टर कोरोना से ठीक होने के बाद भी बच्चों की बेहतर देखभाल की जरूरत पर जोर देते हैं।

एम्स के पीडियाट्रिक विभाग के प्रोफेसर डा. एसके काबरा का कहना है कि जरूरी नहीं है कि कोरोना से बीमार हुए बच्चे ही एमआइएस-सी से पीडि़त हों, ऐसे बच्चे भी इस बीमारी से पीडि़त पाए गए हैं, जिन्हें कोरोना संक्रमण तो हुआ लेकिन लक्षण नहीं दिखे। ऐसे बच्चों में अक्सर संक्रमण से उबरने के बाद बुखार, सांस लेने में परेशानी, त्वचा पर चकत्ते, मुंह में छाले, दस्त, उल्टी व पेट में दर्द की समस्या देखने को मिली है।

इस बीमारी में बच्चों की आंखें लाल हो जाती है, आंख व चेहरे पर सूजन हो जाती है। पिछले साल एम्स में आठ से 10 बच्चे देखे गए थे। वे सभी ठीक हो गए थे। दिक्कत तब होती है जब दो-तीन अंग ठीक से काम करना बंद कर देते हैं। यदि बच्चा खाना पीना छोड़ दे, सुस्त हो तो ब्लड प्रेशर जांच करानी चाहिए। 

ब्लड प्रेशर कम हो तो मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम हो सकता है। इसका तुरंत इलाज जरूरी है। सफदरजंग अस्पताल में किए गए अध्ययन में एमआइएस-सी के लक्षणों का आकलन किया गया तो बुखार ही एक सामान्य लक्षण है जो सभी में पाया जाता है। अन्य लक्षण किसी में होते हैं किसी में नहीं।

एम्स के पीडियाट्रिक विभाग के पल्मोनरी व क्रिटिकल केयर की विशेषज्ञ डा. झुमा शंकर ने कहा कि कोरोना के संक्रमण के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अनियंत्रित हो जाती है। इस वजह से मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम बीमारी होती है और शरीर के कई हिस्से प्रभावित हो जाते हैं।

इलाज के दौरान एंटीबायोटिक के अलावा स्टेराइड, इम्युनोग्लोबुलिन दवा दी जाती है। सांस लेने में परेशानी के कारण कई मरीजों को वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ता है। इस बीमारी में किडनी, लिवर या शरीर का कोई भी हिस्सा प्रभावित हो सकती है।

ये है लक्षण : बुखार- 100 फीसद, मिर्गी या न्यूरो संबंधी परेशानी- 55 फीसद, फेफड़े में संक्रमण- 50 फीसद, त्वचा पर चकते- 35 फीसद, पेट दर्द, उल्टी, दस्त- 25 फीसद, सिर दर्द- 25 फीसद, सांस की नली में संक्रमण- 5 फीसद