पत्रकार ले सकते हैं उपचुनाव  बहिष्कार  का निर्णय 

पत्रकार ले सकते हैं उपचुनाव  बहिष्कार  का निर्णय 

पत्रकार ले सकते हैं उपचुनाव  बहिष्कार  का निर्णय 
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 पत्रकारो का दूसरे दिन भी जारी रहा धरना 
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शनिवार फूलबाग चौराहे पर धरना
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ग्वालियर /ग्वालियर प्रेस क्लब एवं  मामा माणिकचंद वाजपेयी पत्रकार कॉलोनी के बैनर तले पत्रकारों ने दूसरे दिन भी पत्रकार कॉलोनी के विवादित अवधि का लीजरेंट माफ करने एवं पत्रकारों के बीमे की राशि को शून्य करने की मांग को लेकर महात्मा गांधी के प्रतिमा स्थल पर धरना दिया। सरकार द्वारा पिछले बारह साल में कॉलोनी के प्रकरण का निराकरण नहीं होने से नाराज पत्रकार कल 12 सितंबर को फूलबाग चौराहे पर धरना देकर विधानसभा उपचुनाव के बहिष्कार का निर्णय कर सकते हैं। इसके लिए न्याय यात्रा निकाले जाने पर भी विचार-विमर्श चल रहा है। 
  अपरान्ह तीन बजे से पांच बजे तक चले धरने में सभी अखबारों के पत्रकार उपस्थित रहें। इस अवसर पर पत्रकारों ने कहा कि प्रदेश सरकार सभी के लिए कोई न कोई घोषणा  कर रही है, लेकिन पत्रकार जो कि पत्रकार कॉलोनी में सरकारी एजेंसी की धोखाधडी का शिकार हुए हैं उनकी समस्या को नहीं सुना जा रहा है। पत्रकारों का कहना था कि अधिकांश पत्रकारों ने यहां वहां बस चुकी कॉलोनियों में मिल रहे सस्ते प्लॉट को छोडकर पत्रकार कॉलोनी में महंगी दर पर इसलिए प्लॉट लिए थे क्योंकि यह सरकारी एजेंसी है। लेकिन पत्रकार तब सदमें में आ गए जब उन्हें पता चला कि इस सरकारी जमीन पर भूमाफिया और अधिकारियों की मिलीभगत के चलते जमीन की रजिस्ट्री होने से पहले ही भूमाफिया के नाम डिक्री हो चुकी है। इसके बाद पत्रकारों ने इस मामले में दस्तावेज जुटाकर पेश किए और न्यायालय का आदेश आने के बाद तत्कालीन कलेक्टर भरत यादव को एक अभ्यावेदन दिया। जिस पर उन्होंने इस जमीन को लेकर विस्तृत आदेश देते हुए इसे जीडीए की जमीन माना और इस मामले में भूमाफिया द्वारा खडे किए गए आदिवासी राधेलाल के दावे को खारिज कर दिया। पहली बार एक अच्छा आदेश पत्रकारों के पक्ष में आया था, वे आगे कार्रवाई करते इससे पहले उनका स्थानांतरण कर दिया गया। अब यह मामला हाईकोर्ट में है। पत्रकारों के प्रयास के कारण ही इस मामले में राधेलाल आदिवासी और उसके मुख्त्यारआम के खिलाफ धोखाधडी का मामला दर्ज किया गया। लेकिन पुलिस ने आज तक राधेलाल को गिरफ्तार नहीं किया। 
 पत्रकारों ने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि जब तक लीजरेंट की माफी को लेकर शासन द्वारा निर्णय नहीं लिया जाता है तब तक 25 प्रतिशत लीजरेंट लेकर उन्हें भवन निर्माण के लिए एनओसी दी जाए। तीन दिन पहले जीडीए के सीईओ को इस संबंध में एक ज्ञापन दिया था लेकिन उस पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इस कारण पत्रकारों ने तय कर लिया है कि वे 12 सितंबर को धरना देकर आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय करेंगे। इसके बाद बैठक कर अगली रणनीति तय की जाएगी। धरने में ग्वालियर प्रेस क्लब अध्यक्ष राजेश शर्मा , वरिष्ठ पत्रकार राकेश अचल, राजेन्द्र तलेगांवकर,सुरेंद्र माथुर , दिनेश राव ,  चन्द्रवेश पांडे, जोगेन्द्र सेन, बृजमोहन शर्मा, गोपाल त्यागी, अशोक पाल, अजय मिश्रा,चंदरी गर्ग , जयदीप  सिकरवार, रवि उपाध्याय, रवि यादव, मचल सिंह, मुकेश बाथम, सचिन जेन सहित अनेक पत्रकार  शामिल थे।