टूट जाएगा रोजा रमजान में कोरोना वैक्सीन लेने से ?

टूट जाएगा रोजा रमजान में कोरोना वैक्सीन लेने से ?

अगले महीने मुस्लिमों का पाक पर्व रमजान शुरू हो रहा है। 12-13 अप्रैल से शुरू होने वाले रमजान से पहले इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि क्या कोरोना वायरस की वैक्सीन लगवाने से रोजा टूट जाएगा? यह संशय बना हुआ है कि क्या रमजान में यानी रोजा के दौरान वैक्सीन से उनका रोजा तो बाधित नहीं होगा? मुस्लिम देशों में उठ रहे इन सवालों के बीच सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती ने संशय को खत्म किया है। सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती ने कहा कि रोजे के दौरान वैक्सीन लगवाने से उनका रोजा नहीं टूटेगा। 

गौरतलब है कि मुफ्ती की इस सफाई से करोड़ों मुस्लिमों के मन की उस शंका का जवाब मिल गया है जो अब तक रोजा में वैक्सीन लेने को लेकर संशय में थे। बता दें कि इस साल रमजान का पाक महीना 12 या 13 अप्रैल से शुरू हो सकता है। इन दोनों दिनों में से किसी एक का निर्धारन चांद देखने के आधार पर ही होगा। 

अरब न्यूज के मुताबिक, रमजान के पाक महीने से ठीक पहले सऊदी के शेख अब्दुल अजीज अल-अशेख ने कहा कि रोजा करते समय कोरोना वायरस वैक्सीन प्राप्त करना रोजा को अमान्य नहीं करता है। उन्होंने कहा, 'कोरोना वायरस वैक्‍सीन से रोजा रखने वाले व्‍यक्ति का रोजा नहीं टूटेगा क्‍योंकि यह खाना या ड्रिंक नहीं माना जाता है। वैक्‍सीन को शरीर के अंदर लगाया जाता है, इसलिए इससे रोजा नहीं टूटेगा।' 

एस्ट्राजेनेका ने इस पूरे प्रकरण पर सफाई दी है। कंपनी का कहना है कि उसकी कोरोना वैक्सीन में किसी भी तरह के सुअर के मांस का अंश शामिल नहीं है। हालांकि इससे पहले इंडोनेशिया में एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को इस्लाम के नियमों का उल्लंघन करने वाला बताया जा रहा है। इसके बावजूद काउंसिल की तरफ से एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी मिली हुई है।

इधर, मुस्लिमों के बीच इस बात को लेकर भी संशय है कि क्या कोरोना की वैक्सीन में पोर्क का इस्तेमाल किया गया है? हालांकि एस्ट्राजेनेका ने स्पष्ट कर दिया है कि उसके कोविड-19 के टीके में पोर्क के किसी अंश का इस्तेमाल नहीं किया गया है। एस्ट्राजेनेका ने कहा कि मुसलमानों को इस संबंध में तनिक भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। 

दुनिया में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश इंडोनेशिया ने वैक्सीन में पोर्क होने का दावा किया था। इंडोनेशिया के उलेमा काउंसिल ने टीके में पोर्क के इस्तेमाल होने का दावा किया। इसके बाद उलेमा काउंसिल ने शुक्रवार को अपनी वेबसाइट पर टीके को हराम करार देकर इंडोनेशियाई मुसलमानों से इसका इस्तेमाल न करने को कहा। काउंसिल ने कहा, क्योंकि इसको बनाने की प्रक्रिया ट्रिप्सिन का प्रयोग किया जाता है जो सुअर के पैनक्रियाज से जुड़ा है।