कोई लोकसभा चुनाव नहीं जीते, फिर भी माने जाते थे राजनीति के खिलाड़ी।

Share A Public Route

 बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का निधन हो गया है.66 साल की उम्र में अरुण जेटली ने आखिरी सांस ली। बता दें कि अरुण जेटली की तबियत अचानक बिगड़ गयी थी जिसके बाद से उन्हें दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया था ,डाक्टरों की टीम उनकी देखभाल कर रही थी।

उनको घबराहट और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी,जिसके बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया,अरुण जेटली लम्बे समय से बीमार चल रहे थे.उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी,जिसके बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था.

Loading…

उनके एम्स में एडमिट कराये जाने के बाद बीजेपी के नेताओं का जमावड़ा लग गया था.भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनका हाल जानने पहुंचे थे,बता दें कि बीजेपी के लिए ये बड़ी क्षति होगी,क्योंकि अभी हाल ही में देश की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन हुआ था,जिसके बाद बीजेपी शोकाकुल हो गयी थी ,अभी उनके जाने का गम नहीं भूल पायी थी कि अरुण ने भी बीजेपी का साथ हमेशा के लिए छोड़ दिया। अरुण जेटली के निधन के बाद बीजेपी में मातम का माहौल है। 

अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को दिल्ली में हुआ था। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के सााथ-साथ वह पेशे से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता भी हैं। उन्होंने अपने राजनीति अनुभव से जहां बड़े-बड़े मामलों में पार्टी और सरकार को राह दिखाई, वहीं कानूनी पेचीदगियों से भी पार्टी और सरकार को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अरुण जेलटी, नरेंद्र मोदी व अमित शाह के भी करीबी रहे और उससे पहले अटल बिहार वाजपेयी व लालकृष्ण आडवाणी की जोड़ी के भी पसंदीदा राजनेताओं में शामिल रहे हैं। जेटली ने 1975 में आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। उस समय वह युवा मोर्चा के संयोजक थे। उन्हें पहले अंबाला जेल में और फिर तिहाड़ जेल में रखा गया था।

Loading…

अरुण जेटली का जन्म, महाराज कृष्ण जेटली और रतन प्रभा जेटली के घर में हुआ था। उनके पिता भी पेशे से वकील थे। अरुण जेटली की शुरूआती पढ़ाई-लिखाई सेंट जेवियर्स स्कूल, नई दिल्ली से हुई थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बीकॉम किया। 1977 में दिल्ली विश्वविद्यालय से ही उन्होंने वकालत की डिग्री हासिल की। अरुण जेटली बचपन से ही काफी मेधावी रहे, उन्हें अकादमिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। स्कूली पाठ्यक्रम के अलावा वह अतिरिक्त गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। इसके लिए भी उन्हें कई पुरस्कार दिए गए थे। अरुण जेटली के राजनीतिक जीवन की शुरूआत दिल्ली विश्वविद्यालय से हुई थी। 1974 में वह डीयू के छात्र संगठन के अध्यक्ष रहे थे। 24 मई 1982 को अरुण जेटली का विवाह संगीता जेटली से हुआ था। उनका एक बेटा रोहन और बेटी सोनाली है।

अरुण जेटली ने करीब 1975 में सक्रिय राजनीति में पदार्पण कर दिया था। 1991 में वह भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बन चुके थे। मुद्दों और राजनीति की बेहतर समझने रखने वाले अरुण जेटली को 1999 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया गया था। 1999 के चुनाव में अटल बिहारी वायपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार सत्ता में आई। तब की वाजपेयी सरकार में जेटली को सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के साथ ही विनिवेश राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

Loading…

23 जुलाई 2000 को केंद्रीय कानून, न्याय और कंपनी मामलों के कैबिनेट मंत्री राम जेठमलानी ने इस्तीफा दे दिया। जेठमलानी के इस्तीफे के बाद उनके मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी अरुण जेटली को ही सौंप दिया गया था। महज चार माह में उन्हें वायपेयी सरकार की कैबिनेट में शामिल कर कानून, न्याय और कंपनी मामलों के साथ-साथ जहाजरानी मंत्रालय की भी जिम्मेदारी सौंप दी गई। वायपेयी सरकार में लगातार उनका प्रोफाइल बढ़ता और बदला रहा। उन्होंने हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। 2004 के चुनाव में वाजपेयी सरकार सत्ता से बाहर हुई तो जेटली पार्टी महासचिव बनकर संगठन की सेवा करने लगे। साथ ही उन्होंने अपना कानूनी करियर भी शुरू कर दिया था।

सरकार में हमेशा मजबूत स्थिति में रहे अरुण जेटली ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में केवल एक बार 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा। मोदी लहर में जहां छोटे-मोटे प्रत्याशी भी कई लाख मतों से जीते, वहीं अरुण जेटली को अमृतसर लोकसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी अमरिंदर सिंह के हाथों एक लाख से ज्यादा मतों से हार का सामना करना पड़ा था। बावजूद राजनीति में उनका कद और बढ़ा। 2014 के चुनावों में भाजपा ने बंपर जीत के साथ नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाई तो एक लाख से ज्यादा मतों से हारने वाले अरुण जेटली को 26 मई 2014 को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। साथ ही उन्हें कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और रक्षामंत्री का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था। ये राजनीति और भाजपा में अरुण जेटली की अहमियत साबित करता है। मार्च 2018 में वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे थे। इसके पहले उन्हें गुजरात से राज्यसभा सांसद बनाया गया था।

Loading…

sankalp singh sachan

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

रेन फारेस्ट भीषण आग से तबाह हो रहा, दुनिया का सबसे बड़ा जंगल

Sat Aug 24 , 2019
Share A Public Route Loading… एक तरफ जहां पर्यावरण का क्षरण तेजी से हो रहा हैं. वहीं दूसरी ओर एक और बेहद डरावनी घटना सामने आ रही है. दुनिया के सबसे बड़े रेन फॉरेस्ट और ब्राजील में स्थित अमेजन जंगलों में भीषण आग लगी हुई है. ये आग इस कदर […]

login hear

कोई लोकसभा चुनाव नहीं जीते, फिर भी माने जाते थे राजनीति के खिलाड़ी।

खा़स आर्टिकल सिर्फ आप के लिये।

Loading…

Subscribe Please