कपड़े की फैक्ट्री से लेकर 10 लाख करोड़ रुपये की भारत पहली कंपनी बनने का सफर।

1991 के बाद वैल्यूएशन 60,742 गुना बढ़ा निवेशकों ने भी कंपनी के विजन पर आंख मूंदकर भरोसा जताया और सदा इसका समर्थन किया, जिसकी बदौलत जनवरी 1991 के बाद इसका वैल्यूएशन 60,742 गुना बढ़ गया। इस अवधि में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों की कीमत 14,200 फीसदी से ज्यादा बढ़ी।

कपड़े की फैक्ट्री से लेकर 10 लाख करोड़ रुपये की भारत  पहली कंपनी बनने का सफर।

एनर्जी से लेकर टेलिकॉम का कारोबार करने वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) गुरुवार को 10 लाख करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण (MCAP) वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई। इस मुकाम तक पहुंचने में कंपनी को 30 साल लगे। सबसे बड़ी बात यह है कि रिलायंस को भारत की सबसे बड़ी कंपनी बनने में सबसे ज्यादा मदद इसकी तत्परता और समय के साथ बदलने की क्षमता से मिली है। बीते तीन दशक में कपड़े की फैक्ट्री से इसने ऊर्जा क्षेत्र की एक दिग्गज कंपनी बनने तक का सफर तय किया है और इसके बाद उपभोक्ताओं के रुझानों को भांपते हुए डिजिटल और रिटेल सेगमेंट में भारी-भरकम निवेश कर कदम रखा है।

1991 के बाद वैल्यूएशन 60,742 गुना बढ़ा
निवेशकों ने भी कंपनी के विजन पर आंख मूंदकर भरोसा जताया और सदा इसका समर्थन किया, जिसकी बदौलत जनवरी 1991 के बाद इसका वैल्यूएशन 60,742 गुना बढ़ गया। इस अवधि में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों की कीमत 14,200 फीसदी से ज्यादा बढ़ी।



इंटरनैशनल रेटिंग पाने वाली पहली देसी कंपनी
इस अवधि में कंपनी ने कई मुकाम हासिल किए। एसऐंडपी तथा मूडीज द्वारा रेटिंग पाने वाली भारत की यह पहली कंपनी बनी। यही नहीं, 2019 में तिमाही आधार पर 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा पाने वाली कंपनी का तमगा भी अपने नाम किया, जिसके बाद यह 10 लाख करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई है। इस सफर में कंपनी ने कई मुकाम हासिल किए

तमाम कंपनियों को भारी अंतर से पछाड़ा
2 जनवरी, 1991 से लेकर 29 नवंबर, 2019 के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के बाजार पूंजीकरण में 600 गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी अवधि में एलऐंडटी, अशोक लेलैंड, टाटा स्टील, सीएट टालब्रोस ऑटोमोटिव कंपोनेंट, फेडरल-मुगल सागर सीमेंट तथा इंटरनैशनल पेपर APPM जैसी दिग्गज कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 15 गुना से लेकर 205 गुना तक बढ़ा है। आरआईएल ने 2009 के बाद से ही मुनाफे में वृद्धि का सिलसिला शुरू कर दिया था।

 2019 मे  कंपनी पर 2.87 लाख करोड़ का कर्ज
कंपनी के ग्रोथ में कर्ज की बड़ी हिस्सेदारी है, जिसके कारण अक्सर निवेशक चिंता जताते रहे हैं। 31 मार्च, 2019 को इसका समेकित कर्ज 277 फीसदी बढ़कर 2.87 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2009 में 72,256 करोड़ रुपये था। हालांकि, कंपनी ने साल 2021 तक अपने कर्ज को शून्य करने का संकल्प लिया है। कंपनी पर भारी-भरकम कर्ज के बावजूद विदेशी के साथ-साथ घरेलू ब्रोकरेज कंपनियां इसकी उन्नति के प्रति आशान्वित हैं।