कोरोना ने किया मजबूर तो बेटियां संपत्ति में मांगने लगीं अपना हिस्सा

कोरोना ने किया मजबूर तो बेटियां संपत्ति में मांगने लगीं अपना हिस्सा

कोरोना काल ने जहां कारोबार को बड़ी चोट दी वहीं परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बिगाड़कर रख दी। ऐसे में बेटियां भी अपना शरई हक मांगने को मजबूर हो गईं। कानपुर की शरई कोर्ट (शरई पंचायत) में ऐसी 36 बेटियों ने मां-बाप की संपत्ति में अपना हिस्सा (तरका) मांगा है।

शरीयत के मुताबिक मां-बाप की संपत्ति में बेटियों को बेटे से आधी संपत्ति मिलती है। अपने आप तरका देना फिलहाल आम चलन में नहीं आ सका है। महामारी के दौर में कहीं शौहर की नौकरी चली गई तो कहीं वेतन आधा हो गया।

कहीं व्यापार पूरी तरह बैठ गया। ऐसे में बेटियों ने दबाव में या स्वतः पहले तो मां-बाप से उधार मांगा या मदद करने को कहा। जब बात नहीं बनी तो शरई कोर्ट की मदद लेना शुरू कर दिया। ऐसी चार शरई कोर्ट में यह मामले पेंडिंग हैं।

महिला शरई कोर्ट के प्रवक्ता हाजी मोहम्मद सलीस के मुताबिक बेटियों को बेटों से आधा हिस्सा संपत्ति में दिया जाता है। वह चाहे मां की संपत्ति हो या पिता की। मान लीजिए किसी का एक बेटा और दो बेटियां हैं तो कुल चार हिस्से किए जाएंगे। इसमें दो हिस्से बेटे को और शेष एक-एक बेटी को दिया जाएगा। इसी तरह अगर दो बेटे और तीन बेटियां हैं तो कुल सात हिस्से लगेंगे। इसमें बेटियों को एक-एक और बेटों को दो-दो मिलेंगे। बेटी का कम हिस्सा इसलिए है क्योंकि उसे पति की संपत्ति से और मेहर (निकाह के वक्त तय धनराशि) की भी रकम मिलती है। शहर काजी मामूर मजाहिरी का कहना है मजहबी तौर पर मां-बाप को तरका देना चाहिए। ऐसे मामले शरई पंचायतों में आएं यह अच्छी बात नहीं है।

शहर की दारुल कजाओं में इन दिनों ठीक से सुनवाई नहीं हो पा रही है। जिन शरई कोर्ट में सुनवाई होनी थी वहां के कई जिम्मेदार बीमार चल रहे हैं। एक कोर्ट में चीफ काजी के इंतकाल के बाद नए सिरे से गठन किया गया है।

 पति के दबाव में राशिदा (काल्पनिक नाम) को नई सड़क की एक शरई पंचायत में तरके के लिए अर्जी देनी पड़ी। मां-बाप ने निकाह के दौरान बेटी को काफी दहेज दिया था। तीन बेटियां होने की वजह से उन्होंने तरका देने से इनकार कर दिया।

फतेहपुर की अर्शिया (काल्पनिक नाम) ने जरूरत पड़ने पर अपने भाइयों से मदद मांगी थी पर उन्होंने सहायता ही नहीं की। मां-बाप की संपत्ति पर पूरी तरह काबिज भाइयों के रुख से परेशान होकर उसने शहर की महिला शरई कोर्ट में अर्जी दी।