कर्म और न्याय के देवता शनि

कर्म और न्याय के देवता शनि

कर्म और न्याय के देवता शनि

शनि देव के नाम से हर कोई भयभीत हो जाता है। शनि को ज्योतिष में क्रूर और पापी ग्रह कहा जाता है। शनि के अशुभ प्रभावों से व्यक्ति का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। शनि के अशुभ प्रभावों की वजह से जहां व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़तीं है। शनि के शुभ प्रभावों से व्यक्ति का जीवन राजा के समान हो जाता है। शनि रंक को भी राजा बना देते हैं।

देव का नाम आते ही लोगों को शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा का डर सताने लगता है, इसलिए बहुत से लोग शनि देव को अनिष्टकारी मानते हैं, जबकि यह धारण पूरी तरह से गलत है। शनि देव हमारे कर्मफल और न्याय के देवता हैं। उनकी ढैय्या और साढ़ेसाती भी हमारे कर्मों के अनुरूप लाभदायक या हानिकारक होती है। शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है कि हमारे सभी कर्म न्याय और नीति सम्मत हों।

शनि देव ऐसे व्यक्ति से कभी रूष्ठ नहीं होते हैं, अगर फिर भी किसी कारण से शनि देव की दृष्टि आप पर वक्र है, तो शनिवार के दिन शनि चालीसा का पाठ करना लाभप्रद होता है। शनि चालीसा पाठ का लाभ धार्मि​क मान्यताओं के अनुसार, यदि नैतिक कर्म करते हुए व्यक्ति शनि चालीसा का पाठ करता है, तो शनि देव हर परिस्थिति में उसका भला ही करते हैं। मान्यतानुसार शनिवार या मंगलवार को सांयकाल में शनि चालीसा का पाठ करना उत्तम फलदायक होता है।

शनि चालीसा का पाठ पीपल के पेड़ के समीप, हनुमान मंदिर में या शनि मंदिर में करना चाहिए। संभव हो तो सरसों के तेल का दीपक जला कर पाठ करना अच्छा माना जाता है। शनि अपनी दशा के साथ साथ साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान भी व्यक्ति के जीवन को अत्याधिक प्रभावित करते हैं. शनि अशुभ होने पर प्रत्येक कार्य में बाधा प्रदान करते हैं. व्यक्ति का जीवन कष्टों से भर जाता है. जॉब, करियर, शिक्षा, बिजनेस और दांपत्य जीवन को भी प्रभावित करते है इसलिए शनि को शुभ बनाए रखना बहुत ही जरूरी हो जाता है.

शनि की दशा में व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल प्राप्त होता है. न्याय के देवता होने के कारण शनि देव अपनी दशा में व्यक्ति को उसके अच्छे बुरे कर्मों के आधार पर फल देने का कार्य करते हैं. इसके साथ जन्म कुंडली में शनि की शुभ-अशुभ स्थिति भी प्रभाव पड़ता है. इन कार्यों को नहीं करना चाहिए शनि की दशाओं में कभी भी निर्धन, रोगी, परिश्रम करने वालों का अपमान नहीं करना चाहिए. इसके साथ ही दूसरों के धन पर लालच करने से बचना चाहिए. पर्यावरण और पशु-पक्षियों को हानि नहीं पहुंचानी चाहिए.