रिश्वत मांगने की दूसरी ऑडियो ने खोली भृष्ट सिपाही की पोल

रिश्वत मांगने की दूसरी ऑडियो ने खोली भृष्ट सिपाही की पोल

रिश्वत मांगने की दूसरी ऑडियो ने खोली भ्रष्ट सिपाही की पोल

  1. - पहले मामले में बचने की जुगत में लगा था सिपाही
    - मुकदमा निपटाने के लिए कहा ब्यवस्था तो करनी ही पड़ेगी 

औंग थाना क्षेत्र के परसदेपुर गांव से पहले पुलिस ने एक युवक संतोष यादव को उठाया फिर रात भर थाने में बैठाए रखा। फिर युवक को छोड़ने के नाम पर सिपाहियों द्वारा सेटिंग शुरू हुई जिसका ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। जिसमें एसपी ने औंग थाने के एक सिपाही दीपक को निलम्बित कर दिया था। जिसकी आवाज ऑडियो में रुपये मांगते समय सुनाई दे रही थी जबकि इस मामले में वसूली का मास्टर माइंड मनोज सिपाही बच गया था। अधिकारियों का कहना था कि आरोप के आधार पर जांच हो सकती है निलम्बन नहीं। बात भी ठीक है लेकिन इसी मामले में एक नया मोड़ आ गया है भ्रष्टाचार की एक नई ऑडियो सामने आई है जिसमे मनोज सिपाही मुकदमा समाप्त कराने के नाम पर इसी पीड़ित के बड़े भाई शत्रुघ्न से रिश्वत की सेटिंग कर रहा है।


        बता दें कि परसदेपुर के इस मामले की शुरुआत असल मे जून माह में हुई थी। हुआ यूं था कि शत्रुघ्न यादव, संतोष यादव और अर्जुन यादव तीनो सगे भाई हैं इनकी एक जमीन के बंटवारे के मामले में परिवार के ही लोगों से मारपीट हो गई थी जिसमे शत्रुघ्न पक्ष की महिलाएं गम्भीर घायल हो गई थीं जबकि दूसरे पक्ष से भी लोग मामूली घायल हुए थे तब इस घटना की तहकीकात में पहली बार औंग पुलिस शत्रुघ्न आदि के घर गई। फिर थाना पुलिस को दोनों पक्षों ने तहरीर दी लेकिन औंग पुलिस पर आरोप है कि दूसरे पक्ष से सुविधाशुल्क लेकर शत्रुघ्न आदि सभी भाइयो के खिलाफ मारपीट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया जबकि इनकी तहरीर कूड़ेदान में फाड़कर फेंक दी। मुकदमा दर्ज होने से घबराए घायल पक्ष शत्रुघ्न, संतोष आदि घर से हट गए और मुकदमे से बचने के लिए प्रयास करने लगे। इसी दौरान मनोज सिपाही का मैसेज शत्रुघ्न को मिला कि उससे बात कर ले। शत्रुघ्न ने मनोज सिपाही से घटना के बाबत बात की तो मनोज सिपाही ने स्वीकार किया कि उनकी पक्ष की महिलाएं गम्भीर घायल थीं उनका मुकदमा दर्ज होना चाहिए था लेकिन उसका कहना था मिलते तो सब कुछ सम्भव हो जाता। इस पर पीड़ित शत्रुघ्न ने कहा अब तो मुकदमा दर्ज हो गया है अब क्या होगा तो सिपाही मनोज ने कहा तो मुकदमा समाप्त हो जाएगा बस ब्यवस्था करनी पड़ेगी। सिपाही ने कहा मिलकर बात करो आगे बताते हैं क्या करना है। इस ऑडियो से यह निश्चित होता है कि पुलिस असली पीड़ित जानती है फिर भी उसे गम्भीर धाराओं में फंसाती है जबकि दूसरे पक्ष पर मुकदमा भी नहीं दर्ज करती है। बाद में पीड़ित से ही मुकदमे को समाप्त करने की सेटिंग करती है और उसमें सेटलमेंट न होने पर उसका गुस्सा दो महीने बाद अकारण संतोष को घर से उठाकर निकालती है। जिसमे फिर सेटिंग करने के प्रयास में दीपक सिपाही की निलम्बन रूपी बलि चढ़ जाती है पर सरगना बचने की पूरी जुगत करता है। बताते हैं दीपक के निलम्बन के बाद मनोज सिपाही ने अपने निलम्बन और कार्रवाई से बचने के लिए दिव्यांग के घर में लाव लश्कर के साथ दोबारा धावा बोला और एक पेपर पर जबरन साइन करवाया जिसमे लिखा था कि मनोज का इस मामले से कोई संबंध नहीं है। मगर सरगना सिपाही को यह नहीं पता कि उसकी एक पुरानी रिकार्डिंग ने उसके पूरे खेल की पोल खोल दी है। जिसमे वह मुकदमा समाप्त करने की सेटिंग करता हुआ स्पष्ट सुनाई दे रहा है।