एक शिक्षिका ने किया नारी शक्ति का वणर्न

एक शिक्षिका ने किया नारी शक्ति का वणर्न


नारी तो शक्ति है,
ईश्वर की भक्ति है,
इसकी जो कहानी है,
ना किसी ने जानी है।

बचपन गुजारती है,
मां पापा को निहारती है,
उनके लिए जीती है,
आपने दिल की ना सुनती है।

अल्हड़  दिनों में डर कर,
घर से निकलती है,
राहों में अकेले,
जाने से डरती है।

शादी हुई तो घर,
अपना छूटता है,
यादों का चित्र उसकी,
यादों में ही बसता है।

खुश करना सबको,
अपना कर्तव्य समझती है,
औरों की खुशियों में,
उसकी दुनिया बसती है।

बच्चों के आते ही,
खुद को भूल जाती है,
उनके कल के सपनों को,
आंखों में सजाती है।

समानता की कहानी तो,
बस एक कहानी है,
नारी की भावनाएं तो,
 कभी किसी ने ना जानी है।

जीती है सबके लिए,
कौन उसका होता है,
बच्चों का प्यार भी,
ना उसको हासिल होता है,
उनकी अपनी एक नई,
दुनिया बस जानी है।

नारी तो शक्ति है,
त्याग की कहानी है
इसके समर्पण की महिमा,
देवी-देवताओं ने भी मानी है।

लेखनीय- सुनीता कटियार
      प्रा०वि० गुरदही बुजुर्ग