क्या है बजट और अंतरिम बजट में क्यों पहनाया गया जुमला

Please Share

vandana pandey

लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने बजट रुपी पासा फेंक दिया है.  अब उनका यह चुनावी स्ट्रोक कितना कमाल करता है यह तो चुनावी नतीजे आने के बाद ही साफ हो जाएगा. फिलहाल, इस बार जो बजट पेश किया गया है उसे मध्यम वर्ग के लिए अच्छा बजट माना जा रहा है लेकिन इस बजट मे भी लोचा है.

https://youtu.be/gG-xApUR5MIदरअसल, ये बजट बीजेपी के शासन काल का अंतिम बजट है, लेकिन बीजेपी का यह अंतरिम बजट है. अंतरिम बजट में उन्होंने मिडिल क्लास को ध्यान में तो रखा लेकिन सिर्फ अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए. फिलहाल, मोदी सरकार ने अपने इस बजट में क्या कुछ दिया है यह तो आप सभी को पता चल ही गया होगा, फिर भी हम आपको यहां सब कुछ बताएंगे. लेकिन, उससे पहले आप यह जान लें कि आखिर बजट है क्या, और अंतिम और अंतरिम बजट में अंतर क्या है?

आखिर क्या है बजट –

तो जल्दी जल्दी से बजट की परिभाषा पर एक सरसरी निगाह दौड़ा लेते हैं. दरअसल, बजट जो है, वह भारत सरकार के आय और व्यय का एक लेखा जोखा होता है जिसमें विगत वर्ष के आय और व्यय के अनुमानों का एनुअल यानि वार्षिक वित्तीय विवरण होता है. आपको यह भी बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 में भारत में बजट का प्रबंध का उल्लेख किया गया है. जैसाकि आप सभी जानते ही हैं कि भारत में बजट को पेश करने का अधिकार वित्तमंत्री को प्राप्त है. और यह बजट लोकसभा में पेश किया जाता है.

अब जरा बजट शब्द की उत्पत्ति कहां से हुई है इस पर भी गौर फरमा लेते हैं –  

दरअसल, बजट शब्द का प्रयोग सबसे पहले फ्रांस में बुजेट से हुआ. जिसका सीधा सा अर्थ चमड़े का थैला या बैग से है. साथ ही आपको यह भी बता दें कि सन् 1733 में इंग्लैंड में इसे जादू के पिटारे के नाम से सबसे पहले इस्तेमाल किया गया.

अब मोदी जी ने भी किसी जादू के पिटारे से कम का तो काम किया नहीं. सत्ता जाते-जाते जनता को फिर से जुमला पहना दिया.

अंतरिम बजट क्या है-  

बजट पेश होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है अंतरिम बजट. जहन में एक ही सवाल उठ रहा है कि सरकार का आखिरी साल है और जो बजट पेश किया गया है उसे आगे कैसे ले जाया जाएगा…वित्त मंत्री ने बजट पेश करने के दौरान अंतरिम बजट पेश किया. दरअसल, अंतरिम बजट वह बजट है जिसे सरकार अपने बचे हुए समय यानि कि आंशिक समय के लिए संसद में बजट पेश करती है. इस बजट में सरकार कुछ महीनों या फिर कुछ दिनों का अपने राजस्व का लेखा-जोखा तय करती है. जिसे मिनी बजट या वोट ऑन अकाउंट या फिर अंतरिम बजट कहते हैं.

अंतरिम बजट को कब पेश किया जाता है –

अंतरिम बजट को पेश करने के लिए कब का समय निर्धारित किया जाता है. इसे लेकर लोगों में काफी विरोधाभाष भी देखा गया है. आपके इ स भ्रम को दूर करने के लिए बता दें कि अंतरिम बजट चुनावी साल में पेश किया जाता है. मतलब कि जिस साल लोकसभा चुनाव होने वाले होते हैं उस वर्ष पेश किया गया बजट अंतरिम बजट कहलाता है. मोदी सरकार ने अपना पांचवा और आखिरी बजट लोकसभा में पेश किया है. जिसमें सिर्फ नई सरकार बनने तक के राजस्व का लेखा जोखा तय किया गया है. यह केवल वित्तीय वर्ष के शुरूआती 4 महीनों का बजट होगा.

अब मोटी-मोटी नजर में आप अंतरिम और आम बजट में भी अंतर जान लीजिए, जिससे कि अगर कोई आपसे पूछे तो आप उसे गलत जानकारी देने के बजाए सही-सही बता सकें.

दरअसल, आम बजट पूरे वित्तीय वर्ष के राजस्व का लेखा जोखा होता है और अंतरिम बजट एक सीमित अवधि के लिए पेश किया जाता है.

आम बजट साल के फरवरी माह में पेश किया जाता है और अंतरिम बजट चुनावी साल में पेश किया जाता है. जिसकी अवधि सीमित होती है.

यूनियन बजट का आर्थिक सर्वेक्षण होता है जबकि अंतरिम बजट पेश होने के बाद किसी भी तरह का कोई आर्थिक सर्वेक्षण नहीं होता है.

आम बजट या यूनियन बजट में बड़े खर्चों को शामिल किया जाता है जबकि अंतरिम बजट में बड़े खर्चों का कोई प्रावधान नहीं है.

अंतरिम बजट में किसको क्या मिला –

 2019 के अंतरिम बजट में मोदी सरकार ने किसानों का खास ध्यान रखा है. इसलिए अन्यदाता को किसान सम्मान निधि की सौगात मोदी सरकार ने इस बजट में दिया है. 75 हज़ार करोड़ की इस योजना में 12 करोड़ किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा. इस योजना के तहत छोटे किसानों जिनकी दो हेक्टेयर जमीन है, उनके खाते में 6 हजार रुपए दो-दो हजार की तीन किश्तों में अकाउंट में डालने का ऐलान पीएम ने किया है.

मजदूरों के हाथ क्या लगा –

पीएम ने मजदूरों को भी अपने इस बजट में ध्यान में रखा है. दरअसल, संगठित क्षेत्र में काम करने वाले और महीने में 21हजार रुपए कमाने वाले लोगों को 7 हजार रुपए सालाना बोनस देने का ऐलान मोदी सरकार ने इस बजट में किया। वही 60साल से ज्यादा उम्र वाले मजदूरों को हर महीने 3000 रुपए की पेंशन दी जाएगी. बता दें कि पीएम की इस योजना से सीधे 10करोड़ मजदूरों को फायदा पहुंचेगा.

घर की चाह रखने वालों को भी राहत

अंतरिम बजट में घर की चाह रखने वालो यानि घर खरीदने वालों को भी जीएसटी में राहत देने का ऐलान किया गया है। 2.40लाख रुपए तक मकान किराए पर टीडीएस भी खत्म कर दिया गया है।

राष्ट्रीय कामधेनु योजना –

750 करोड़ के बजट की राष्ट्रीय कामधेनु योजना का ऐलान मोदी जी ने अपने इस बजट में किया है. वहीं सरकार ने पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए कर्ज में 2 फीसदी छूट देने की घोषणा की है.

ग्रामीण महिलाओं को सौगात

बीजेपी सरकार बजट पेश करे और महिलाओं को भूल जाए, कैसे हो सकता है? अंतरिम बजट में मोदी जी ने महिलाओं को जुमला पहनाया है. जुमला किस चीज का यह भी देख लीजिए. दरअसल, बीजेपी सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छ ईंधन मुहैया कराने के लिए उज्जवला योजना के तहत 8 करोड़ एलपीजी कनेक्शन का लक्ष्य निर्धारित किया है जिसमें से 6 करोड़ कनेक्शन बांटे जा चुके हैं वहीं गर्भवती महिलाओं के लिए मातृवंदना योजना लागू की गई जिसका लाभ गर्भवती महिलाओं को दिया जाएगा. हालांकि, पहले भी उज्जवला योजना का लाभ कितनी महिलाओं को मिला है यह सिर्फ कागजों पर ही दिखता होगा, बाकी जमीनी हकीकत क्या है, यह सभी जानते हैं.

डिफेंस और रेलवे सेक्टर कभी मिला लाभ –

रेलवे और डिफेंस को यह सरकार कैसे भूल सकती है. इसलिए मोदी सरकार ने बजट में डिफेंस सेक्‍टर के लिए 3 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है. सूत्रों की मानें तो यह अब तक रक्षा क्षेत्र में हुआ सबसे ज्यादा आवंटन है. वही अंतरिम बजट में भारतीय रेलवे को 1.58 लाख करोड़ का बजट सौंपा है जिससे रेलवे के आधुनिकीकरण पर ध्यान दिया जाएगा.

तो यह था बीजेपी का जुमला बजट. बीते सालों में पेश किए गए बजट का लाभ अभीतक जनता को नहीं मिल पाया है और यहां एक और लालच देकर लोकसभा चुनाव में जनता को लुभाने का श्रीगणेश मोदी सरकार ने इस अंतरिम बजट से कर दिया है. अगर इसी बजट में केंद्र सरकार जनसंख्या नियंत्रण को लेकर एक और बजट पेश कर देती तो शायद बेरोजगारी को कहीं तक नियत्रंण में लाया जा सकता था. फिलहाल, अभी चुनाव है तो जनता दिख रही है, चुनाव गया तो कहां की जनता और कहां का बेरोजगार.    

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »