‘अटल जी’ बहुत याद आओगे

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आज हम अपने इस लेख में चर्चा करने जा रहे है उस शख्शियत की  जो आज हमारे बीच में नहीं है,लेकिन दिलो में जिन्दा है मरते दम तक जिन्दा रहेगी,एक ऐसा नाम जो भारतीय राजनीति में किसी पहचान का मौहताज नहीं,वो नाम खुद में ही एक पहचान था,जी हां हम बात करने जा रहे है अपने देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई की जो अब हमारे बीच में  नहीं है,भारतीय जनता पार्टी के 93  वर्षीय दिग्गज नेता को किडनी ट्रैक्ट इंफेक्शन,यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, पेशाब आने में दिक्कत और सीने में जकड़न की शिकायत के बाद 11 जून को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली(एम्स) में भर्ती कराया गया था, वह पिछले कई दिनों से जीवन रक्षक प्रणाली पर थे,कल दिनांक 16 – 08 -2018  को शाम पांच बजकर पांच मिनट पर नई दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में उन्होंने आखिरी सांसे ली।
श्री बाजपेयी को भारतीय राजनीति एक आदर्श के रूप में देखती है, नेहरू जी के बाद वह दूसरे ऐसे भारतीय नेता थे जो तीन बार प्रधानमंत्री बने,अटल जी पिछले लगभग 65 वर्षों से भारतीय राजनीति में
सक्रिय थे ,सन 1955 में पहली बार उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन सफलता नहीं मिली,इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और  सन् 1957  में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर  लोकसभा में पहुँचे। .                                     1980   में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की। 6  अप्रैल 1980  में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी को सौंपा गया।दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने सन् 1998 मेें प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभाली।
अटल जी ने अपने शाशनकाल में भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बनाया ,स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना,कारगिल  पर विजय,एक सौ साल से
भी ज्यादा पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाया,कुछ ऐसे  ऐतिहासिक कार्य कर डाले जिसके लिए भारत देश की जनता उनकी सदैव आभारी रहेगी ।
अटल जी कभी किसी जाति विशेष के नेता यह थे,वह सबके थे,उनकी इसी आदत ने आज हर देशवासी की आँखें नम कर दी,दोपहर 1 बजे बीजेपी मुख्यालय से उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अटल जी की अंतिम यात्रा के दौरान बीजेपी मुख्यालय से पैदल चलते हुए स्मृति स्थल पहुंचे,पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अंतिम विदाई देने और अपने
प्रिय नेता की एक झलक पाने के लिए पूरे रास्ते में  जनता का हुजूम उमड़ा रहा.
भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्कार संपन्न हो गया। शुक्रवार शाम करीब पांच बजे उनकी बेटी नमिता ने अटल जी को मुखाग्नि दी। इस दौरान हल्की बारिश भी हुई जैसे प्रकृति भी इस जन नायक को अंतिम विदाई दे रही हो। अटल जी की अंतिम यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब 4 किलोमीटर पैदल चले।
भारतीय राजनीति के वो ही एक एकलौते नेता थे ,जिनके नाम के आगे स्वतः सभी की जुबां से ‘जी’ शब्द लग जाता है ,आज सारे देश की जनता की जुबान पर ये ही शब्द है अटल जी आप बहुत याद आओगे ।

( लेखक दिव्यांश सिंह जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय नई दिल्ली से पत्रकारिता के विद्यार्थी हैं)

2 thoughts on “‘अटल जी’ बहुत याद आओगे

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