धुआं उगलने वाला वाहन भी हो जाएगा प्रदूषण मुक्त, 40 रुपये में प्रदूषण जांच

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 विजय नगर में बाइक का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) और नंबर प्लेट की फोटो दी। केंद्र संचालक ने इसे कंप्यूटर में लिया और बिना वाहन जांचे 40 रुपये में प्रदूषण जांच का सर्टिफिकेट दे दिया। मशीन से जांच पूछने पर महीनेभर बाद आने को कहा। फीस बताई 150 रुपये।

 विजय नगर के ही एक दूसरे केंद्र में शहर के बाहर गई कानपुर नंबर की एक बाइक का सर्टिफिकेट बनवाने को कहा। जनाब फौरन राजी हो गए। फोन पर नंबर प्लेट की फोटो व आरसी मंगाने को कहा। फोटो वाट्सएप पर मंगवाते ही घंटेभर बाद प्रमाण पत्र जारी हो गया।

 विजय नगर के ही एक तीसरे केंद्र में वाहनों की जांच का यही हाल मिला। गाड़ी की आरसी व नंबर प्लेट की फोटो देखी और बिना जांच पड़ताल के प्रमाण पत्र का प्रिंट थमा दिया गया। कमाल देखिये, प्रदूषण नियंत्रण के सारे आंकड़े भी फर्जी तरीके से भर दिए गए।

 खबर में दिए गए ये तीन केस सिर्फ यह बताने के लिए है कि नए मोटर व्हीकल एक्ट के लागू होने के बाद कुछ लोगों के लिए किस कदर लाटरी लग आई है। पुलिस सिर्फ सर्टिफिकेट देखने में व्यस्त है और संभागीय परिवहन विभाग के अफसर इस अंधेरगर्दी को मौन स्वीकृति दिए बैठे है। नतीजा सामने है। भारी-भरकम जुर्माने से बचने के लिए रोजाना सैकड़ों लोग इन धंधेबाजों के हाथों लुट रहे है। लूट का अंदाजा भी इस बात से लगाइये कि एक घंटे में एक सेंटर 30 से ज्यादा सर्टिफिकेट थमा दे रहा है। शहर में ऐसे 15 केंद्र चल रहे है। इन्हें कोई फर्क नहीं कि वाहन कितना ही धुआं उगल रहा है।

प्रदूषण की जांच का केंद्र चलाने वाले कंप्यूटर पर एक सॉफ्टवेयर डाउनलोड किए हुए है।उसमें मनचाहा डाटा फीड करके ग्लासी पेपर पर प्रिंट निकाल रहे है। कंप्यूटर, प्रिंटर, कैमरा और स्कैनर से लैस ये केंद्र प्रदूषण की जांच भी नहीं करते। इनके पास पोल्यूशन स्मोक मशीन भी नही है। गाड़ी न हो तो भी सर्टिफिकेट देने में हिचक नहीं। सिर्फ मोबाइल फोन पर गाड़ी के नंबर प्लेट की फोटो चाहिए। उसे कंप्यूटर पर लिया और दे दिया प्रिंट।

परिवहन विभाग ने सारथी पोर्टल के जरिये ऑनलाइन जांच व सर्टिफिकेट की व्यवस्था कर रखी है। इसके लिए वाहन का लाना जरूरी है। प्रदूषण ज्यादा निकला तो यह सर्टिफिकेट ही जारी नहीं करेगा। पर, इस साफ्टवेयर के जरिये कुछ ही लोग काम कर रहे है।

पुलिस भी खेल से अनजान है। उसे तो प्रदूषण प्रमाण पत्र चाहिए। अधिकांश को असली-नकली की पहचान नहीं है। जांच केंद्र संचालक इसी का फायदा उठा रहे है।

गाड़ी की जांच किए बगैर प्रदूषण प्रमाण पत्र देना गलत है। साक्ष्य मिलने पर संबंधित जांच केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई की उप परिवहन आयुक्त को सिफारिश करूंगा।

अभी मुझे इस तरह के प्रमाण पत्र जारी होने की सूचना नहीं है। शुक्रवार को इसकी जांच कराएंगे। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

sankalp singh sachan

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