उत्तर प्रदेश

विश्वविद्यालयों की परीक्षा हो सकती हैं निरस्त

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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय कमेटी ने राज्य विश्वविद्यालयों की प्रस्तावित परीक्षाएं निरस्त करने की सिफारिश की है। कमेटी ने विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने का फार्मूला भी सुझाया है। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट पर दो जुलाई को फैसला लिया जाएगा। पहली जुलाई को केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की गाइड लाइन जारी होने वाली है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को उनके सरकारी आवास पर हुई बैठक में भी इस मुद्दे पर विचार किया गया। इस बैठक में उच्च शिक्षा के साथ-साथ बेसिक शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल पहली जुलाई खोलने के फैसले पर सहमति जताई गई।

इस तरह प्राथमिक शिक्षकों को पहली जुलाई से स्कूल जाना होगा। हालांकि बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे। शिक्षकों को पाठ्यक्रम संबंधी एवं अन्य प्रशासनिक कार्य निपटाने होंगे। माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों के बारे में भी कोई फैसला दो जुलाई को ही होगा। पहली जुलाई को जारी होने वाली केंद्र सरकार की गाइड लाइन देखने के बाद ही सरकार कोई फैसला लेगी। 

शासन ने राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं कराने के संबंध में तीन दिनों के अंदर संस्तुतियां देने के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। मेरठ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. तनेजा कमेटी की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के कुलपति प्रो. अशोक मित्तल, छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर की कुलपति प्रो.नीलिमा गुप्ता और डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित सदस्य बनाए गए थे। सोमवार को कमेटी के अध्यक्ष प्रो. तनेजा ने उच्च शिक्षा विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। सूत्रों के अनुसार कमेटी ने छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत करने के लिए अलग-अलग मॉडल सुझाए हैं। अब शासन को तय करना है कि किस मॉडल को अपनाया जाए। 

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